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पिनयिन, रोमाजी या IPA — शब्द के नीचे लिखी लाइन का मतलब क्या है

चीनी, जापानी या कोरियाई शब्द के नीचे कभी-कभी एक ही आवाज़ दो-तीन तरह से लिखी दिखती है। हर लिखावट किसी अलग सवाल का जवाब है। कौन-सी किस काम की है, और उसे पढ़ना कब बंद करें।

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पिनयिन, रोमाजी या IPA — शब्द के नीचे लिखी लाइन का मतलब क्या है

Mullawo में किसी जापानी शब्द के नीचे नज़र डालिए, तो एक ही लाइन में तीन चीज़ें दिख सकती हैं: みず mizu [mˈizɯᵝ]। चीनी शब्द के नीचे दो होती हैं: 橙色 chéngsè और वर्गाकार कोष्ठक में लिप्यंतरण। पहली नज़र में लगता है कि एक ही बात तीन बार लिख दी गई है। ऐसा है नहीं। कौन-सी चीज़ क्या बताती है, यह समझ लें, तो शुरू के महीनों की काफ़ी उलझन से बच जाएँगे।

एक लाइन, तीन अलग सवाल

IPA — सुनने में यह कैसा है? कोष्ठक के अंदर वाला हिस्सा अंतरराष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में है। इसमें हर आवाज़ का एक निशान है, और भाषा कोई भी हो, निशान वही रहते हैं। तीनों में से बस यही आवाज़ को ख़ुद लिखने की कोशिश करता है, उसकी किसी वर्तनी को नहीं। Mullawo में जिस भी भाषा का लिप्यंतरण दिया गया है, उसका IPA रूप मौजूद है।

रोमनीकरण — इसे टाइप कैसे करें, और यह सिखाया कैसे जाता है? चीनी, जापानी और कोरियाई के लिए Mullawo वह मानक लातिनी वर्तनी भी दिखाता है जिसे ये भाषाएँ ख़ुद अपनाती हैं:

  • चीनी — पिनयिन, सुर के निशानों समेत: 橙色 chéngsè (नारंगी)।
  • जापानी — रोमाजी: オレンジ色 orenji-iro।
  • कोरियाई — Revised Romanization, जो दक्षिण कोरिया की सरकारी प्रणाली है: 주황색 juhwangsaek।

फ़ोन के कीबोर्ड पर यही टाइप किया जाता है, पाठ्यपुस्तकों में यही छपा मिलता है, और सड़क के बोर्डों और नक़्शों पर भी यही दिखता है। पर यह लिखने का एक तरीक़ा है, आवाज़ का बयान नहीं: पिनयिन का zh और कोरियाई का eo वैसे नहीं पढ़े जाते जैसे अंग्रेज़ी पढ़ने वाला सोचेगा।

काना-पाठ — अपनी ही ध्वनि-लिपि में यह शब्द कैसे लिखा जाता है? यह हिस्सा सिर्फ़ जापानी में मिलेगा। कांजी में लिखे शब्द के बगल में काना में उसका पाठ दिया जाता है: 水 → みず, オレンジ色 → オレンジいろ। जापानी पाठक शब्द पढ़ते समय मन में यही सुनता है — और रोमाजी से फ़र्क़ यह है कि यह ख़ुद जापानी है।

तीनों को अलग क्यों रखा

पहले ये सब एक ही फ़ील्ड में भरे रहते थे, और कार्ड पर उसी जगह इनमें से कोई भी दिख सकता था। सीखने वाले के लिए यह सिरदर्द है: mizu उच्चारण है या वर्तनी? और [mˈizɯᵝ] — कहीं यह कोई दूसरा शब्द तो नहीं?

इसलिए अब लाइन में हर एक की अपनी तय जगह है, और क्रम हमेशा वही रहता है — काना-पाठ, रोमनीकरण, IPA। लाइन भी एक ही रहती है, ताकि कार्ड पलटते वक़्त उस पर लिखा शब्द ऊपर-नीचे न उछले।

कौन-सी भाषा, कौन-सी लाइन

चीनी: पिनयिन पढ़िए, और सुरों को हल्के में मत लीजिए। सुर के निशान सजावट के लिए नहीं हैं। mā, má, mǎ, mà चार अलग शब्दांश हैं; सुर ग़लत लगा, तो शब्द या तो कुछ और बन जाता है या कुछ भी नहीं रहता। पिनयिन को निशानों समेत पढ़िए, स्पीकर के साथ-साथ शब्द बोलिए, और सुर को वर्तनी का ही हिस्सा मानिए। किसी आवाज़ पर अटकें — मसलन zh, j और z में फ़र्क़ न कर पाएँ — तो IPA देख लीजिए, पर रोज़ का काम पिनयिन से ही चलेगा।

जापानी: काना पढ़िए, और रोमाजी से जितनी जल्दी हो सके पीछा छुड़ाइए। पहले हफ़्ते में भाषा में घुसने का सबसे तेज़ रास्ता रोमाजी है, पर पहला साल पार करने का सबसे सुस्त भी वही है। हिरागाना और काताकाना मिलाकर कोई सौ चिह्न हैं, और भाषा असल में इन्हीं में लिखी जाती है। इन्हें पढ़ना आ गया, तो कांजी के ऊपर लिखा पाठ ही काफ़ी है, और रोमाजी फिर बस शोर रह जाती है।

कोरियाई: हांगुल पढ़ना आते ही रोमनीकरण बंद। इसमें साल नहीं, हफ़्ता लगता है — देखिए हांगुल कैसे काम करता है। उसके बाद Revised Romanization सिर्फ़ रास्ते का रोड़ा है, क्योंकि कोरियाई को हांगुल जितनी सटीकता से लिखता है, लातिनी अक्षर नहीं लिख सकते।

बाक़ी सब भाषाएँ: शक हो तो IPA, स्पीकर हर बार। स्पेनिश या जॉर्जियाई में वर्तनी से ही ज़्यादातर पता चल जाता है कि शब्द कैसे बोला जाएगा। अंग्रेज़ी, फ़्रेंच या पुर्तगाली में ऐसा नहीं होता, और वहाँ इस ख़ास शब्द में अक्षर कौन-सी आवाज़ दे रहे हैं, यह सच-सच सिर्फ़ IPA बताता है। फिर भी कोई लिप्यंतरण शब्द को कान से सुनने की बराबरी नहीं कर सकता — स्पीकर दबाइए, और धीमी रफ़्तार में सुनना हो तो दोबारा दबाइए।

लाइन कब बंद करें

यह पूरी लाइन सेटिंग्स के एक ही स्विच से चलती है — ट्रांसक्रिप्शन दिखाएं। जब लिपि अकेले काफ़ी लगने लगे, इसे बंद कर दीजिए: हांगुल के पहले हफ़्ते के बाद, काना पर हाथ बैठ जाने पर, या जब ग़ौर करें कि शब्द की जगह लातिनी अक्षर पढ़ रहे हैं। किसी नई शुरू की हुई भाषा के लिए इसे जब चाहें फिर से चालू कर सकते हैं।

चीनी इस मामले में अलग है। चीनी अक्षरों से उनकी आवाज़ का पता नहीं चलता, इसलिए ऐसा दिन कभी नहीं आता जब सिर्फ़ लिपि देखकर आप नया शब्द बोल सकें। जब तक नए शब्द आ रहे हैं, लाइन चालू रखिए।

तो करें क्या

  1. शुरू के हफ़्तों में लाइन ज़रूर पढ़िए। यह एक पुल है, और पुल होते ही पार करने के लिए हैं।
  2. वह लिपि सीखिए जिसमें भाषा सच में लिखी जाती है — काना, हांगुल — और जैसे ही हो सके, रोमनीकरण का सहारा लेना छोड़ दीजिए।
  3. चीनी में सुर के निशान कभी मत छोड़िए। पिनयिन में बस यही हिस्सा है जिसके बिना गुज़ारा नहीं।

असली शब्दों पर आज़माने के लिए तैयार?

Mullawo शुरू करने के लिए मुफ़्त है — 31 भाषाएँ, अंतराल दोहराव, दिन में पाँच मिनट।

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